सुप्रीम कोर्ट अंतरिम प्रमुख की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को तैयार

सुप्रीम कोर्ट एम नागेश्वर राव को अंतरिम सीबीआई प्रमुख बनाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को तैयार हो गया है। यह सुनवाई अगले सप्ताह होगी। एनजीओ कॉमन कॉज और आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने यह याचिका लगाई है। सीबीआई के नए निदेशक की नियुक्ति होने तक सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक राव को 10 जनवरी को अंतरिम प्रमुख का प्रभार सौंपा गया था।

याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की थी मांग
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एनएल राव और जस्टिस एसके कौल की बेंच के सामने बुधवार को यह मामला रखा गया।

याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने बेंच से इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई करने का अनुरोध किया। हालांकि, चीफ जस्टिस ने कहा- शुक्रवार को तो सुनवाई बिल्कुल संभव नहीं है, यह अगले हफ्ते की जाएगी।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति ने 10 जनवरी को आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ के पद से हटा दिया था। वर्मा पर भ्रष्टाचार और कर्तव्य की उपेक्षा के आरोप थे।

1979 की बैच के आईपीएस अफसर वर्मा को सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेस और होम गार्ड विभाग का महानिदेशक बनाया गया था। हालांकि, उन्होंने सीबीआई चीफ के पद से हटाए जाने के अगले ही दिन नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। वर्मा का सीबीआई में कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म हो रहा था।

वर्मा को पद से हटाने वाली समिति में प्रधानमंत्री के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के रूप में जस्टिस एके सिकरी थे।

सरकारी स्कूलों के 8वीं क्लास के 56% छात्रों को बेसिक गणित नहीं आती। कक्षा 5 के 72% छात्रों को भाग करना नहीं आता। 8वीं के 27% छात्र दूसरी के स्तर की किताबें भी नहीं पढ़ पाते। तीसरी क्लास के 70% स्टूडेंट बाकी (घटाना) नहीं कर सकते। प्रथम एनजीओ की एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (एएसईआर)-2018 में यह नतीजे सामने आए हैं।

10 साल पहले के मुकाबले छात्रों के प्रदर्शन में गिरावट
एएसईआर के मुताबिक 10 साल पहले के मुकाबले 2018 में स्कूली छात्रों के प्रदर्शन के स्तर में गिरावट आई है। साल 2008 में यह पाया गया कि कक्षा 5 के 37% छात्र गणित के बेसिक सवालों को हल कर सकते थे। लेकिन, 2018 में ऐसे छात्रों का आंकड़ा घटकर 28% रह गया। साल 2016 में ये संख्या 26% थी।

रीडिंग में भी छात्र पिछड़ रहे हैं। साल 2008 में 8वीं कक्षा के 84.8% स्टूडेंट कक्षा 2 के स्तर की टेक्स्ट बुक पढ़ने में सक्षम थे। साल 2018 में ऐसे छात्रों की संख्या घटकर 72.8% रह गई। यानी कक्षा 8 के 27% छात्र दूसरी के स्तर की किताबें भी नहीं पढ़ सकते।

एएसईआर के मुताबिक बेसिक अंकगणित में लड़कियां, लड़कों से पीछे हैं। रिपोर्ट तैयार करते वक्त यह सामने आया कि 50% लड़कों के मुकाबले सिर्फ 44% लड़कियां अंकगणित के सवालों को हल कर सकती हैं। हिमाचल, पंजाब, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में लड़कियों का प्रदर्शन बाकी राज्यों के मुकाबले बेहतर है।

प्रथम एनजीओ ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए 28 राज्यों के 596 जिलों से डेटा जुटाए। इसके लिए 3 से 16 साल के 5.5 लाख बच्चों से सवाल-जवाब किए गए।

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