लोग नरेंद्र मोदी में वाजपेयी को देखना चाहते थेःकश्मीर डायरी

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के भंग किए जाने के कुछ दिनों बाद मैं एक सप्ताह के लिए घाटी गया था, जहाँ मैंने तीन बातें महसूस की.

कश्मीर में भारत का कोई नेता आज भी लोकप्रिय है तो वो हैं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी. अलगाववादी आज भी उनका नाम इज़्ज़त से लेते हैं, पाकिस्तान और भारत की समर्थक पार्टियाँ भी.

लोग उन्हें एक दूरदर्शी नेता के रूप में देखते हैं. आज भी लोग उनके उस बयान को याद करते हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर की समस्या को मानवता के दायरे में हल करना चाहिए

पूर्व प्रधानमंत्री अलट बिहारी वाजपेयी की तारीफ़ मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने भी की और महबूबा मुफ़्ती ने भी. सड़कों पर मिले आम युवाओं ने भी उनके कश्मीर के मसले को हल करने की कोशिशों को याद किया और दुकानदारों और व्यापारियों ने भी.

आम तौर पर कश्मीर के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की छवि देखना चाहते थे, लेकिन वो निराश हुए.

श्रीनगर का ट्रैफ़िक जाम पत्थर बाज़ी से बड़ी समस्या
साल 1989 से चरमपंथी हमलों, पत्थरबाज़ी और लगातार हिंसा के साये में आबाद जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर भारत के दूसरे बड़े शहरों की तरह फ़ैलता जा रहा है, प्रगति कर रहा है.

शहर के ऐतिहासिक जामा मस्जिद के आसपास लगभग हर जुमे की नमाज़ के बाद पत्थरबाज़ी होती है. लेकिन हिंसा केवल पुराने शहर तक सीमित रहती है.

ट्रैफ़िक जाम पूरे शहर में है और इससे रोज़ नागरिकों को जूझना पड़ता है.

इमारतों और दुकानों के निर्माण के कारण शहर की हवा में धूल-ग़र्द बहुत है. अधिकतर तरक़्क़ी अनियोजित है, जिसके कारण ट्रैफ़िक जाम रोज़ की समस्या बन गया है.

शहर की आबादी 13 लाख के क़रीब बताई जाती है, लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं कि यहाँ 18-20 लाख लोग आबाद हैं.

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